कुत्तों की नस्लें? राजनीति में ये क्या बयान! फेसबुक कमेंट्स मे मेटा AI का अनोखा विश्लेषण!

आपने फेसबुक पर किसी पोस्ट के कमेंट सेक्शन को ज़रूर देखा होगा. कई बार ये कमेंट सेक्शन काफी चर्चा में रहते हैं, जहाँ लोगों की राय अलग-अलग होती है और बहस भी गरमाती रहती है. 

मगर क्या आप जानते हैं कि अब फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर इन कमेंट सेक्शन का विश्लेषण कर रही है और यूजर्स को संक्षिप्त जानकारी दे रही है!

लेकिन ये विश्लेषण कुछ अजीबोगरीब नतीजे भी दे रहा है, जिससे यूजर्स और सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स में चर्चा छिड़ गई है. आइए, इस खबर को थोड़ा और विस्तार से जानते हैं.

मेटा की AI कैसे कर रही है विश्लेषण?

मेटा ने हाल ही में कुछ फेसबुक यूजर्स के लिए नई सुविधा शुरू की है, जहाँ कमेंट सेक्शन के ऊपर ही उस डिस्कशन का एक संक्षिप्त सारांश दिखाई देता है. 

ये सारांश AI द्वारा तैयार किया जाता है, जो कमेंट्स का विश्लेषण कर ये बताने की कोशिश करता है कि चर्चा किस बारे में हो रही है और लोगों की राय कैसी है.

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समस्या कहाँ है?

समस्या ये है कि कई बार ये AI-जनरेटेड सारांश काफी बेतुके या फिर असल मुद्दे से हटकर होते हैं. 

उदाहरण के लिए, एक ऐसे न्यूज़ आर्टिकल के कमेंट सेक्शन में, जहां किसी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा चल रही थी, AI ने सारांश में बताया कि लोग “कुत्तों की नस्लों” के बारे में बात कर रहे हैं! 

ऐसे ही कई और उदाहरण सामने आए हैं, जहां AI ने पूरी तरह से बेतुका सारांश दे दिया है.

इसका क्या मतलब है?

इससे ये पता चलता है कि टेक्स्ट विश्लेषण करने वाली AI अभी भी विकास की प्रारंभिक अवस्था में है.

खासकर, सोशल मीडिया कमेंट्स का विश्लेषण करना और उनका सार निकालना काफी जटिल काम है. 

कमेंट्स में अक्सर मीम्स, व्यंग और ह्यूमर का इस्तेमाल होता है, जिन्हें समझ पाना AI के लिए मुश्किल होता है.

इसके अलावा, कई बार फेसबुक पर चर्चा काफी गरमाती रहती है और लोग एक-दूसरे से सहमत नहीं होते. ऐसे में, AI के लिए ये मुश्किल हो जाता है कि वो एक संक्षिप्त और सटीक सारांश तैयार कर सके.

क्या ये फीचर फायदेमंद है?

हालांकि अभी शुरुआती दौर में ये AI-जनरेटेड सारांश भले ही अजीबोगरीब हों, लेकिन भविष्य में ये काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. 

जैसे-जैसे AI टेक्नोलॉजी विकसित होगी, वैसे-वैसे ये कमेंट सेक्शन का बेहतर विश्लेषण कर पाएगी और सटीक सारांश दे सकेगी. 

इससे यूजर्स को ये पता चल सकेगा कि किसी पोस्ट के कमेंट सेक्शन में किस बारे में चर्चा हो रही है और लोगों की राय कैसी है. इससे लंबे कमेंट सेक्शन को स्क्रॉल करने की ज़रूरत कम हो जाएगी.

हालाँकि, कुछ चिंताएँ भी हैं!

कुछ सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये AI सारांश गलत जानकारी फैलाने का जरिया भी बन सकते हैं.

साथ ही, ये सारांश असल चर्चा को दबा भी सकते हैं और लोगों को सिर्फ एक खास नजरिया ही दिखा सकते हैं.

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निष्कर्ष

कुल मिलाकर, फेसबुक कमेंट सेक्शन का AI द्वारा विश्लेषण करना एक दिलचस्प प्रयोग है. हालांकि, अभी ये शुरुआती दौर में है और कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. 

भविष्य में ये टेक्नोलॉजी काफी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावनाओं को भी नजरअदाज नहीं किया जा सकता|

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